रजनीकांत

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रजनीकांत का जन्म 12 दिसम्बर, 1950, बैंगलोर, कर्नाटक में हुआ, उनकी लोकप्रियता को शब्दों में नहीं आंका जा सकता। तमिल सुपर स्टार रजनीकांत की जिन्हें लोग भगवान की तरह पूजते हैं। अपने बेमिसाल और अनोखे अंदाज की वजह से वह तमिल क्षेत्र का यह सुपरस्टार पूरे भारतवर्ष में प्रसिद्ध हो गया। इसके बाद उन्होंने एक-एक करके तमिल और हिन्दी सिनेमा मे ऐसी यादगार फ़िल्में दीं जिसने दर्शकों के मस्तिष्क पर गहरी छाप छोड़ी।

रजनीकांत का असली नाम शिवाजी राव गायकवाड़ है। उनका जन्म 12 दिसंबर, 1950 को कर्नाटक के बैंगलोर में एक मराठा परिवार में हुआ था। छोटी सी उम्र में ही उनकी मां का देहांत हो गया, जिससे उनको बहुत तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। शुरुआत में उन्होंने अपनी पढ़ाई आचार्य पाठशाला से शुरू की। बाद में उन्होंने उच्च शिक्षा बैंगलोर के रामकृष्ण मिशन से पूरा किया। 1981 में लाथा रंगराजन उनकी जीवनसंगिनी बनीं। उनकी दो बेटियां ऐश्वर्या और सौन्दर्या हैं।

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रजनीकांत के दो छोटे भाई और एक बहन है। जब वह पांच साल के थे, उनकी मां जीजाबाई का देहांत हो गया। उसके बाद उनके ऊपर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। मां की मौत के बाद अपनी बदली जीवनशैली में उन्हें अपने समुदाय में कुली का काम करना पड़ा। कुलीगिरी करते हुए शुरुआती शिक्षा उन्होंने आचार्य पाठशाला में पाई और उच्च शिक्षा रामकिशन मिशन में हासिल की। 1966 से 1973 के बीच उन्होंने चेन्नै से लेकर बेंगलुरु तक कई नौकरियां कीं। इसके बाद उन्हें बेंगलुरु ट्रांसपोर्ट सर्विस में बस कंडक्टर की नौकरी मिल गई। फिर शुरू हुई थियेटर की ज़िंदगी। उन्हें थियेटर में पहला मौका मशहूर नाट्य लेखक और निदेशक टोपी मुनिअप्पा ने दिया। महाभारत की कथा पर आधारित एक नाटक में उन्होंने उन्हें दुर्योधन का रोल दिया। उनका अभिनय सराहा गया। इस दौरान उनके सहकर्मी राज बहादुर ने उन्हें मद्रास फ़िल्म इंस्टिट्यूट जॉइन करने की सलाह दी। पढ़ाई का सारा खर्चा उन्होंने उठाया। नाटकों में अभिनय के दौरान मशहूर फ़िल्म निदेशक के. बालचंदर की नजर उन पर गई। बालचंदर ने उन्हें तमिल सीखने और बोलने की सलाह दी। रजनीकांत ने उनकी सलाह मान ली और बाद में तमिल उनके करियर में सहायक हुई। फ़िल्म इंस्टिट्यूट की ट्रेनिंग के बाद उनकी फ़िल्मी गाड़ी चल निकली।

संघर्ष के दिनों में रजनीकांत ने बेंगलुरू में मैसूर मशीनरी में भी कुछ दिन काम किया और चावल के बोरे ट्रकों में लादने का भी काम किया जिसके लिए उन्हें 10 पैसे प्रति बोरा मिलता था। उसके बाद उन्होंने एक परीक्षा दी और बेंगलूर परिवहन सेवा से बस कंडक्टर का लाइसेंस हासिल किया। रजनीकांत 19 मार्च, 1970 को बस चालक राजा बहादुर के साथ नौकरी पर लग गए। रजनीकांत ने फ़िल्मों की दुनियां में 1975 में प्रवेश किया तब वह महज 25 वर्ष के थे और उनकी पहली फ़िल्म ‘रागंगल’ थी। उनके अभिनय की वजह से इस फ़िल्म ने काफ़ी नाम कमाया और धीरे-धीरे इस कंडक्टर ने अपने सिगरेट पीने और चश्में पहनने की स्टाइल की वजह से तमिल फ़िल्मों में तूफान खड़ा कर दिया। तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा उस समय रजनीकांत को गिने-चुने खलनायकों के रुप जाना जाता था।

रजनीकांत ने बतौर एक्टर अपने कॅरियर की शुरुआत की तमिल फ़िल्म अपूर्व रागंगा से। जिसमें कमल हासन ने भी एक्टिंग की थी। इस फ़िल्म का निर्देशन किया था के बालचंदर ने। इस फ़िल्म में रजनी को बहुत ही छोटा सा किरदार निभाने को दिया गया था। इस फ़िल्म को बेस्ट तमिल फ़िल्म के लिए नॉमिनेट किया गया था और फ़िल्म ने उस अवॉर्ड को जीता भी। रजनीकांत निर्देशक बालचंदर को हमेशा अपना मेंटर मानते रहे। बॉलीवुड में रजनीकांत ने अंधा कानून फ़िल्म से एंट्री की थी। इस फ़िल्म में अमिताभ बच्चन मेन लीड हीरो थे और उनके साथ थीं हेमा मालिनी। ये फ़िल्म उस साल की सबसे बड़ी हिट थी और इसने बॉक्स ऑफिस पर काफ़ी कमाई की थी। उसके बाद रजनी ने हम, फ़िल्म की जो की काफ़ी हिट रही। मार्च 2011 में रजनीकांत को हेल्थ से जुड़ी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। रजनी की तबियत कुछ समय तक काफ़ी खराब रही और उस वक्त टीवी चैनल्स के द्वारा रिसर्च में पता चला कि रजनीकांत डेड गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च किया जाने वाला टर्म और ट्विटर का सबसे टॉप का ट्रेंड था। तबियत खराब होने के बावजूद रजनीकांत 2011 में ही रिलीज हुई शाहरुख खान की फ़िल्म रा.वन में नज़र आए 2010 में रजनीकांत और ऐश्वर्या राय की फ़िल्म रोबोट रिलीज हुई थी जो की रजनी की तमिल फिक्शन फ़िल्म एंथिरन का हिन्दी वर्जन थी।

फ़िल्म समीक्षक नमन रामचंद्रन ने रजनीकांत की जीवनी को किताब की शक्ल दी है जिसमें 1975 में उनकी पहली फ़िल्म ‘अपूर्व रगंगल’ से लेकर हिंदी फ़िल्मों ‘अंधा कानून’ और ‘हम’ तक के उनके सफर और ‘बिल्ला’, ‘थलपति’ और ‘अन्नामलाई’ जैसी उनके अंदाज वाली फ़िल्मों से ‘बाशा’, ‘मुथू’, ‘शिवाजी’ और ‘एंथिरन’ तक की यात्रा का वृतांत लिखा है। ‘रजनीकांत : द डेफिनिटिव बायोग्राफी’ में रजनी के बचपन के दिनों से लेकर उनके जीवन के संघर्ष के दिनों को भी बयां किया गया है जब शिवाजी राव गायकवाड़ नाम का यह शख्स बस कंडक्टर के कॅरियर के बाद फ़िल्मों का सुपरस्टार बना और लोगों के बीच रजनीकांत नाम से मशहूर हो गया। पेंगुइन द्वारा प्रकाशित इस किताब के अनुसार बस यात्रियों को टिकट देने में रजनीकांत से तेज कोई नहीं था। वह अपने अंदाज में मुसाफिरों को टिकट देते थे और खुले पैसे देते थे। उनके मशहूर अंदाज के चलते ही लोग उनकी बस का इंतज़ार करते थे और सामने से अनेक बसें ख़ाली जाने देते थे। रजनी का यही अंदाज बाद में फ़िल्मों में भी उनकी लोकप्रियता का कारक बना जहां उनके संवाद भी मशहूर हुए।

रजनी ने अपने बस कंडक्टर के दिनों को याद करते हुए बयां किया है, ‘मैं साधारण इंसान हूं। बस कंडक्टर से पहले मैं दफ्तर में काम करता था, कुली था और बढ़ई का काम कर चुका था।’ बीटीएस पर रजनीकांत की मुलाकात राजा बहादुर से हुई जिसे वह आज अपना सबसे अच्छा दोस्त बताते हैं। किताब के पन्ने पलटते हुए पता चलेगा कि बस सेवा समाप्त होने के बाद रजनी और राजा अपने अपने घर जाकर थोड़ी देर आराम करते थे। इसके बाद रजनीकांत हर शाम हनुमंत नगर में राजा के घर पहुंचते और दोनों नाटकों के अभ्यास के लिए निकल जाते जिनका आयोजन वे समय-समय पर बीटीएस संघ के बैनर तले करते थे। दिवंगत रंगकर्मी और अभिनेता शिवाजी गणेशन को याद करते हुए रजनीकांत कहते हैं, ‘मैंने उन्हें देखा, उनकी नकल उतारी। उनकी वजह से मैं सिनेमा जगत में आया।’ रजनीकांत के जीवन की ऐसी अनेक रोचक कहानियां इस किताब में पढ़ने को मिल जाएंगी।
बस कंडक्टर से शुरू होकर दुनिया के अत्यंत पसंदीदा और पूजनीय अभिनेता बनने का सफर तय करने वाले शिवाजी राव गायकवाड़ उर्फ रजनीकांत की कहानी किसी ब्लॉकबस्टर मूवी के लिए बेहतरीन कहानी साबित हो सकती है।

हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन भी उनकी सादगी के प्रशंसक हैं।

अभिनेता शाहरुख़ खान कहते हैं, “भारतीय सिनेमा में उनके जैसा कलाकार आज तक कोई नहीं हुआ है। इस उम्र में भी उनका उत्साह और उनकी मेहनत देखते ही बनती है। रजनीकांत इतने बड़े स्टार हैं लेकिन उनमें घमंड बिलकुल नहीं है। हम सब को उनसे ये सीखना चाहिए। मुझे गर्व है कि मैं रजनीकांत के दौर में पैदा हुआ हूं।”

हिंदी ब्लॉकबस्टर ‘गोलमाल’ के तमिल संस्करण ‘थिल्लु मुल्लु’ में रजनीकांत की बहन की भूमिका निभाने वाली विजी चंद्रशेखर का मानना है कि हर किसी से एक समान व्यवहार करने की क्षमता ने रजनीकांत को यह कद दिया है। विजी ने कहा कि रजनीकांत सेट पर सभी के साथ अत्यंत सम्मान के साथ पेश आते हैं और सभी को बराबर महत्व देते हैं। भले ही वह लाइट ब्यॉय हो या सहायक कलाकार, रजनीकांत किसी से भेदभाव नहीं करते। विजी ने कहा कि सुपरस्टार हमेशा सफल रहने वाले को नहीं, बल्कि जो सफलता और विफलता का समान रूप से सामना करे और सामान्य बना रहे उसे माना जाता है। फ़िल्म के सेट पर काम के दौरान उनकी सादगी महसूस की। अभिनेत्री ने कहा कि सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि रजनीकांत सफलता और विफलता को समान रूप से लेना भलिभांति जानते हैं।

तमिल फ़िल्म निर्माता लक्ष्मी रामकृष्णन महसूस करते हैं कि रजनीकांत सुपरस्टार इसलिए हैं, क्योंकि वह यह नहीं मानते कि वह अद्वितीय हैं। रामकृष्णन ने कहा कि रजनीकांत सुपरस्टार कहलाना पसंद नहीं करते, लेकिन वह हैं क्योंकि लोगों ने उन्हें यह बनाया है। सुपरस्टार पैदा नहीं होते, बनते हैं। लेकिन, यदि कोई सुपरस्टार बनने के लिए बुरी तरह हाथ-पांव मारता है तो निश्चित रूप से वह विफल होगा।

तमिल फ़िल्मों के सुपर स्टार और भगवान माने जाने वाले अभिनेता रजनीकांत अबसी बी एस ई (CBSE) के कक्षा 6 की किताबों में पढ़े जायेंगे। जिसमें उनकी बस कंडक्टर से लेकर एक महानतम अभिनेता बनने तक का सफर है। जो बच्चों को यह सिखायेगा कि अपनी मेहनत और योग्यता के बल पर आदमी फर्श से अर्श पर पहुंच सकता है बस आदमी को कड़ी मेहनत और दृढंसंकल्पी होना चाहिए। CBSE के कक्षा 6 के बच्चों में रजनीकांत का चैप्टर पढ़ाया जायेगा जिसे लिखा है रजनीकांत के उस फैन और मित्र ने जिनका नाम है राव बहादुर। जो उस बस के ड्राईवर हुआ करते थे जिस बस के कंडक्टर रजनीकांत थे। चैप्टर का नाम है ‘From Bus Conductor to Superstar’। इस पाठ को पढ़ाने का यही उद्देश्य है कि बिना किसी गॉडफादर की मदद से कोई भी व्यक्ति आम से ख़ास हो सकता है। बोर्ड को लगता है कि रजनीकांत की कहानी आने वाली पीढ़ी के लिए एक आदर्श बनेंगी। इस पाठ में केवल रजनीकांत के संघर्ष की ही कहानी नहीं है बल्कि उनकी दयालुता, उनके प्रेम और सदाचार का भी वर्णन किया गया है।

उनकी देश के प्रति समर्पण और इतनी ऊंची जगह पहुंचकर भी एकदम से सरल होना भी पाठ में बताया गया है।

रजनीकांत को 29 अप्रैल को सांस की परेशानी के कारण इसाबेल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन उसी दिन छुट्टी भी दे दी गई। इसके बाद उन्हें चार मई को इसी अस्पताल में दोबारा भर्ती कराया गया। 13 मई को उन्हें सांस और दूसरी परेशानियों के कारण श्री रामचंद्र मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया।

रजनीकांत को फ़िल्म ‘नाल्लावानकु नाल्लावन’ के लिए ‘बेस्ट तमिल ऐक्टर’ का पहला फ़िल्मफेयर अवॉर्ड 1984 में मिला। इसके बाद उन्हें फ़िल्म जगत के कई बड़े पुरस्कारों से नवाजा गया। भारतीय सिनेमा में महत्त्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें साल 2000 में पद्मभूषण दिया गया। मशहूर अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘फोर्ब्स’ ने 2010 में रजनीकांत का नाम सबसे असरदार भारतीयों की लिस्ट में शामिल किया।

कर्नाटक की राजधानी बैंगलोर में 12 दिसंबर 1950 को जन्मे रजनीकांत को उनके दीवाने किस हद तक चाहते हैं इस बात का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जब पिछले साल सुपर स्टार रजनीकांत बीमार पड़े थे तो लोगों ने खान-पीना छोड़ दिया था। बस उनकी एक ही ख्वाहिश थी कि उनका यह चहेता सितारा बहुत जल्द ठीक होकर घर वापस आ जाये। एक सिंपल से बस कंडक्टर से अपनी जीविका की शुरूआत करने वाले रजनीकांत का काम आज भी बदस्तूर जारी है। लोग उनकी फ़िल्मों का बेसब्री से इंतज़ार करते है। केवल तमिल सिनेमा ही नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा में भी रजनी की फ़िल्मों का बोलबाला रहा। उनका सिगरेट पीने का ढंग और दुश्मनों को पीटना आज भी किसी को रोमांचित कर जाता है।

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