‘झूठा कहीं का’ हो या कोई भी फिल्म… मैं एक किरदार होता हूँ…!- जिमी शेरगिल

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‘ऋषि जी के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?

– ‘मेन्टास्टिक!’ एक शब्द में जवाब देते हैं जिमी शेरगिल, जब उनसे पूछा गया फिल्म ‘झूठा कहीं का’ में उनके किरदार को लेकर। ‘दरअसल काम तो हम हमेशा करते हैं, करते रहते हैं। लेकिन, कभी कभी किसी एक्टर के साथ या अपने से सीनियर्स के साथ काम करने का मजा बड़ा मजेदार बन जाता है। संयोग से इस फिल्म में मुझे दोनों बातें मिली। ऋषि जी तो बहुत कमाल के इंसान है, एक्टर हैं और हयूमरस पर्सनेलिटी हैं। फिल्म के दोनों यंग हीरोज (सन्नी सिंह और ओमकार कपूर) भी हमें बहुत इज्जत दे रहे थे। आज की जनरेशन बहुत सीखकर कैमरे का सामना करती है।

‘फिल्म ‘झूठा कहीं का’ में जिमी का रोल टॉमी पांडे का है जो सन्नी सिंह का बड़ा भाई है। वह भोजपुरी भाषी फैमिली है। एक फैमिली पंजाबी है और एक गुजराती फैमिली है। इन सबका गड्मगड्ड रवैया कोतुहल भरा है। ‘टॉमी एक अजीब स्वभाव वाला किरदार है जो कब भड़क जाएगा, पता नहीं।’

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‘आपने बहुत तरह के रोल किए हैं, क्या ऐसा रोल पहले भी किया हैं?

– शायद नहीं, सोचना पडे़गा। वैसे एक बात बता दूं। चाहे फिल्म ‘झूठा कहीं का’ हो…. या मेरी कोई भी फिल्म रही हो मैं वहाँ सिर्फ एक किरदार होता हूँ। डायरेक्टर ने बता दिया कि यह रोल है, ऐसा करना है फिर मैं उस रोल को मेरी शैली में एडॉप्ट करके पेश कर देता हूँ। मैंने क्या किया है इस पर फिर बाद में लोग चर्चा करते हैं मैं नहीं सोचता।

गुलजार साहब की फिल्म ‘माचिस’ मेरी पहली फिल्म थी, जब शॉट अच्छा होता था, तो गुलजार साहब खुश होकर एक टॉफी देते थे। अपने करियर की शुरूआत करने वाले जिमी हिन्दी और पंजाबी दोनों भाषा की फिल्मों में बराबर का रूतबा रखते हैं। ‘हरियाणवी भी मेरे लिए उतनी ही सहज है। वह कहते हैं। मेरी कई फिल्मों ने मुझे विशेष छाप दिया है। ‘तनु वेडस मनु’ और ‘तनु वेडस मनु रिटर्न’ के करेक्टर राजा अवस्थी की भी रूतबे में अलग पहचान रही है। ‘झूठा कहीं का’ का टॉमी भी एक पहचान छोड़ेगा, यकीन है।

‘माचिस’, ‘मोहब्बतें’, ‘मेरे यार की शादी हैं’, ‘हासिल’, ‘मुन्ना भाई एम बी बी एस’, ‘बस एक पल’, ‘रकीब’, ‘तनु वेड्स मनु’, ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न’, ‘डर एट मॉल’, ‘साहिब बीवी और गैंगस्टर’, आदि ये सब जिमी के रोल की यादगार फिल्में है। उनकी नई फिल्में हैं ‘जजमेंटल है क्या’, फैमिली आफ ठाकुर गंज’, ‘झूठा कहीं का’ आदि। वह कभी निर्माता के सामने ‘ये करूंगा’, ‘ये नहीं करूगा’ जैसी हरकतें जताने वाले कलाकार नहीं रहे है। यही वजह है कि हर निर्माता जिमी के साथ दुबारा काम करने की इच्छा रखता है। वह कहते है। ‘मैं काम को पूजा मानता हूँ। अपने करियर के आरंभ में मैं भी कन्फ्यूज था कि करियर को किस रूप में शेप दूं। लेकिन, बाद में समझ आ गया कि यहाँ अपने चाहने से सबकुछ नहीं हुआ करता। चाहने के चक्कर में ट्रेन छूट जाती है।

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‘आजकल सिनेमा का कटेंट प्रमुख हो गया है। ऐसे में नये अपने वाले कलाकार भ्रमित हैं कि करियर को शेप देने के लिए वह क्या करे और क्या ना करें। उनको कुछ सलाह देगें?

– मैंने पहले ही कहा है कि करियर का क्या शेप दें यह प्रायः अपने हाथ में नहीं हुआ करता। जहाँ तक सिनेमा के कंटेंट की बात है, यह कलाकार नहीं बल्कि प्रोडक्शन कंपनियाँ डिसाइड करती हैं। मेरा मानना है और जो मैं पालन करता हूँ कि  अपना काम बेहद इमानदारी से करो। पसंद और ना पसंद दर्शकों पर छोड़ दो। फिल्म चल गई तो सब ठीक वर्ना सब गड़बड़ नयों के मत्थे पर आ जाता है।

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