INTERVIEW!! विनोद खन्ना अच्छे और नये पात्रों (रोल्स) की तलाश में ?

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मायापुरी अंक, 56, 1975

विनोद खन्ना आज उन हीरोज़ की गिनती में है जिनका बॉक्स ऑफिस पर ड्रा है। उसके बावजूद वह अधिकतर ऐसी फिल्मों में काम कर रहे है जिनमें उनके अलावा एक या दो हीरो और है। इसीलिए ‘हेराफेरी’ के सेट पर वह मिले तो मैंने उनसे कहा।

‘इम्तिहान’ ‘अचानक’ ‘प्रेम कहानी’ में आपका मंझा हुआ अभिनय इस बात का प्रमाण है कि आप में आत्मविश्वास आ गया है। फिर क्या वजह है कि आप सोलो हीरो की फिल्मों की बजाय एक से अधिक हीरो वाली फिल्मों में अधिक काम कर रहे है। जैसे खून पसीना, हेराफेरी, चोर सिपाही, नहले पे दहला, एक और एक ग्यारह।

इसका कारण यह नहीं है कि मैं सोलो हीरो की फिल्मों में काम करने से डरता हूं, आपकी बताई फिल्मों के अलावा कैद भी बॉक्स ऑफिस पर हिट रही है। उसमें मैं सोलो हीरो हूं। सेवक की रिपोर्ट भी अच्छी है। उसमें भी मैं अकेला हीरो हूं। दरअसल आज का ट्रेंड ही ऐसा है कि निर्माता एक से अधिक हीरो लेकर फिल्में बनाने पर मजबूर है। क्योंकि इस तरह निर्माता को अपनी फिल्म की कीमत ज्यादा मिलती है और हम कलाकारों को अधिक सावधानी से अपना टैलेंट दिखाने का अवसर मिलता है। प्रेम कहानी इसका जीवंत प्रमाण है। विनोद खन्ना बोले। वरना आज मैं जिस जगह खड़ा हूं मैं समझता हूं कि मेरे कदम बतौर हीरो जम गए हैं और मैं इसीलिए अपने करियर से संतुष्ट हूं।
हमें एक बार आपने बताया था कि आप अधिक से अधिक अचानक और इम्तिहान जैसी फिल्म करना चाहते है, फिर आप यह स्टंट फिल्में क्यों कर रहे है? मैंने पूछा।

मैं दिल से नही कर रहा हूं। ऐसी फिल्में मजबूरी से करनी पड़ रही है। क्योंकि आजकल ट्रेंड ही मारधाड़ वाली फिल्मों का है। मैं कोशिश करता हूं कि जो भी नई फिल्म लूं उसमें (कहानी या पात्र में) कोई न कोई नई बात जरूर हो। मेरी इस बात से लोग घबराने भी लगे है कि मैं उनके कामों में हस्तक्षेप करता हूं। हालांकि ऐसी बात नही है। हर कलाकार चाहता है कि उसके अंदर बैठा हुआ कलाकार कुछ करके दिखा सके जिसे लोग बरसों याद करें। किंतु बदकिस्मती से ऐसी फिल्में बड़ी मुश्किल से मिलती है। फिलहाल मुझे अभी तक ऐसा रोल नही मिला है। विनोद खन्ना ने बताया।

‘हेरा फेरी’ की शूटिंग के दौरान आप घायल हो गए थे। अब यह जख्म कैसा है? मैंने उठते हुए पूछा।
वह बहुत मामूली ज़ख्म था टूटे हुए ग्लास अमिताभ पर हमला करना था गलती से हाथ चूक गया और ग्लास मेरे मुंह से ही टकरा गया। जिससे मेरा होंठ जख्मी हो गया था। तुरंत डॉक्टर के पास जाकर टांके लगवाने पड़े और एक सप्ताह के आराम के बाद मैं एकदम भला चंगा हो गया। अब तो पता भी नही चलता कि कहां चोट लगी थी। विनोद ने बताया।

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