INTERVIEW: रेखा से गई गुजरी नहीं- मौसमी चटर्जी

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मायापुरी अंक, 58, 1975

नटराज स्टूडियो में मौसमी चटर्जी दिखाई पड़ गई। तो हमें ऐसा लगा कि ईद का चांद देख लिया है समय मिलते ही मैंने कहा।
मौसमी जी सुना है शशि कपूर की तरह आप भी बिलिंग के मामले में परेशान करने लगी हैं मैंने कहा।
नहीं तो! मैंने तो आजतक कभी किसी को जान बूझ कर परेशान नही किया। यह और बात है कि कोई शेर के मुंह में हाथ डालेगा तो शेर काटेगा जरूर मौसमी ने मासूमियत से कहा।

हमने सुना है कि आपने ‘भोला भाला’ के निर्माता को अल्टीमेटम दिया कि फिल्म में आपका नाम रेखा से पहले दिया जाए मैंने कहा।
मैंने ऐसा कोई अल्टीमेटम नहीं दिया। मैं पब्लिसिटी के मामले में इतनी उत्सुक कभी नहीं रही। न मैं और हीरोइनों की तरह पब्लिसिटी की भूखी हूं। मैं नाम में नही काम में विश्वास रखती हूं। और जहां तक काम का संबंध है, मैं समझती हूं कि रेखा से गई गुजरी नही हूं। फिर भी अधिक महत्वपूर्ण है। मेरा नाम उससे पहले दिया जाए तो इसमें हर्ज भी क्या है। मौसमी बोली दरअसल जहां दो हीरोइनें होती है, वहां ऐसी बातें ना चाहते हुए भी अपने आप ही पैदा हो जाती है। अगर निर्देशक इंसाफ पसंद हो तो ऐसे झगड़े खड़े ही नही होते। लेकिन ऐसे निर्माता-निर्देशक बहुत कम हैं जो दूसरों का दबाव कबूल न करके अपने मन में काम करें। मैंने इसीलिए भविष्य में दो हीरोइनों की फिल्मों में काम न करने का निश्चय किया है।

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