मिडिल क्‍लास बीचवाले की उम्‍मीदें और सपने बदल रहे हैं- यह कहना है कलाकारों का

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मिडिल क्‍लास व्‍यक्ति यानी ’बीचवाला’ की जिंदगी अर्थव्‍यस्‍था में महत्‍वपूर्ण वृद्धि जैसे प्रमुख कारणों की वजह से काफी बदल रही हैं। इसकी वजह से औसत मिडिल क्‍लास व्‍यक्ति की इच्‍छाओं में बदलाव आ गया है। चाहे सोशल मीडिया या फिर ताजा खबरें, एजुकेशनल कोर्सेज या फैशन, किराने का सामान या किताबें, ये सारी चीजें बस एक बटन दबाने से मिलती हैं, उनके पास हर चीज तक पहुंचने का आसान जरिया हो गया है। आज का मिडिल क्‍लास उर्फ बीचवाले केवल अच्‍छी जिंदगी की चाहत नहीं रखता, बल्कि उसे वास्‍तविकता में बदलने के लिये कड़ी मेहनत भी करता है। वह केवल उन सुविधाओं का आनंद नहीं लेते, बल्कि इस बात का भी ध्‍यान रखते हैं कि आगे आने वाली पीढ़ी को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

‘बीचवाले- बापू देख रहा है’, सोनी सब की हालिया प्रस्‍तुति मिडिल क्‍लास परिवार की कहानी है। इस शो का प्रसारण 2 अक्‍टूबर से सोमवार-शुक्रवार, रात 10 बजे शुरू हो चुका है। यह शो मिडल क्‍लास के लोगों की उम्‍मीदों और सपनों, परीक्षाओं और परेशानियों की कहानी कहता है। हमने सोनी सब के कलाकारों से मिडिल क्‍लास और उनकी बदलती इच्‍छाओं के बारे में उनके विचार जानें। आइये जानते हैं, उन्‍होंने क्‍या कहा।

 निखिल खुराना, ‘जीजाजी छत पर हैंके पंचम ने कहा, ‘’हमारा देश तरक्‍की कर रहा है और मिडिल क्‍लास व्‍यक्ति का नजरिया बदल रहा है। उसकी महत्‍कांक्षाएं तेजी से बढ़ रही हैं, वह अपने सपनों को पूरा करने पर भरोसा करने लगा है। वह केवल अपने बलबूते पर कुछ पाने की चाह कर रहा है।‘’

कृष्‍णा भारद्वाज का मानना है कि मिडिल क्‍लास की इच्‍छाएं बदल गई हैं। ”हमारा इंटरनेट सेवी समाज, भौतिक चीजों की दुनिया के बारे में जान रहा है, जिसकी वजह से उसके सपने और इच्‍छाएं बदल गई हैं।” पुराने दिनों को याद करते हुए वह कहते हैं, ”मुझे गर्व है कि मैं रांची के एक मिडिल क्‍लास परिवार से आया हूं। मिडिल क्‍लास लोग हर छोटी से छोटी चीज का पर्याप्‍त इस्‍तेमाल करना जानते हैं, उसका एक दिलचस्‍प उदाहरण है टूथपेस्‍ट की ट्यूब से आखिरी बूंद तक कंघी की मदद से पेस्‍ट को निकाल लेना, ऐसा करने की हमारी आदत होती है। इतना ही नहीं, हम सेफ्टी पिन्‍स से चप्‍पलों की मरम्‍मत भी कर लेते हैं। वैसे हम दिल से अमीरों से अमीर होते हैं, क्‍योंकि हम हमेशा अपने परिवार और दोस्‍तों की मदद करना चाहते हैं, इससे फर्क नहीं पड़ता है कि क्‍या परेशानी है। मुझे ऐसा लगता है कि बीचवाला होने की वजह से मैं अच्‍छा एक्‍टर बन पाया हूं।‘’ कृष्‍णा सोनी सब पर तेनाली रामा की भूमिका निभा रहे हैं।

 आमीर दल्‍वी, ‘अलादीन-नाम तो सुना होगाके दुष्‍ट वज़ीर के अनुसार, बीचवाले खुशकिस्‍मत लोग होते हैं। उन्‍हें दोनों ही पहलुओं का अनुभव करने का मौका मिलता है। वैसे, वह हमेशा चीजों के बीच पिसते रहते हैं। पिछले कई सालों में उनकी इच्‍छाएं निश्चित रूप से बदली हैं और वे भी बदले हैं। इसका सबसे बड़ा कारण सोशल मीडिया है। आज के मिडिल क्‍लास में आगे बढ़ने की काफी ललक होती है। पहले मिडिल क्‍लास व्‍यक्ति के लिये महंगी कार खरीदना मुश्किल होता था। हालांकि, विश्‍व स्‍तर पर चीजें बदल रही हैं और सफलता की वजह से ही मिडिल क्‍लास इंसान धीरे-धीरे उपलब्धि हासिल करने में सक्षम हो गया है, यह लक्‍जरी अब उनकी पहुंच में आ गई है।

आमिर यह भी कहते हैं कि किस तरह ब्रांड्स जो केवल प्रभावी लोगों के लिये होते थे, वे भारतीय बाजारों में प्रवेश कर चुके हैं और हर किसी के लिये उपलब्‍ध हैं। मिडिल क्‍लास लोगों की इच्‍छाओं में केवल भौतिक चीजें ही शामिल नहीं हैं, बल्कि उनके पूरे लिविंग स्‍टैंडर्ड की बेहतरी शामिल है। वह उन ऊंचाइयों को छूना चाहते हैं, जहां उनकी मेहनत उन्‍हें ले जा सकती है। वह सपने देखने लगे हैं, लेकिन साथ ही जमीन से भी जुड़े हुए हैं, इससे उन्‍हें जब अपना मनचाहा मिलता है तो वह और भी खास हो जाता है।

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