इस वर्ष की सबसे बेहतरीन फिल्म ‘सीक्रेट सुपरस्टार’

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रेटिंग****

मां बेटी के मर्मर्स्पशी प्यार तथा एक पंद्रह वर्षीय लड़की की संगीत को पाने की ललक तथा एक क्रूर बाप के परिवार पर किये जुल्मों की बेहद प्रभावशाली दास्तान है निर्देशक अद्वैत चंदन की फिल्म ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ ।

बड़ोदरा में रह रहे एक मुस्लिम परिवार में एक रूढिवादी पिता राज अर्जन, मां मेहर विज तथा एक पंद्रह वर्षीय बेटी जायरा वसीम तथा उसका छोटा भाई तीर्थ शर्मा हैं। जायरा एक बेहतरीन सिंगर है और उसका सपना एक नामचीन गायिका बनने का है लेकिन वो अपने क्रूर बाप से बेहद त्रस्त है जो उसकी मां को बेरहमी से पीटता रहता है। लिहाजा उसके सामने दो काम हैं एक तो अपने बेरहम बाप से मां का पीछा छुड़ाना, दूसरा अपनी गायिकी से दुनियां को परिचित करवाना। एक दिन वो चेहरे पर जेहाब पहने अपना वीडियो नेट पर अपलोड कर देती है। देखते देखते उसके वीडियो के हजारों लाखों फैन हो जाते है। एक लगभग अस्त हो चुके कॅरियर लेकिन बड़ेबोले म्यूजिक डायरेक्टर शक्ति यानि आमिर खान जायरा का वीडियो देखते हैं तो वे उसे गवाने के लिये बेचैन हो उठते हैं। वे उसे किसी तरह मुंबई बुलाना चाहते हैं जबकि उसका बाप पूरे परिवार के साथ सउदी जाकर जायका की शादी कर देना चाहता है। लेकिन एक दिन जायरा मुबंई के लिये पलायन कर जाती है और शक्ति से मिलती है। बाद में उसका गाया गाना उसे कहां से कहां पंहुचा देता है। क्या आगे जायरा का गायिका बनने का सपना पूरा होता है, क्या वो अपने बाप से अपनी मां को बचा पाती है। अगर ये सब फिल्म में देखा जायेगा तो अच्छा लगेगा।

आमिर खान एक बार नहीं कई बार साबित कर चुके हैं कि वे जितने बेहतरीन अदाकार हैं उससे कहीं बड़े डायरेक्टर और कास्टिंग डायरेक्टर हैं। इस फिल्म से ये बात बखूबी साबित हो जाती है क्योंकि उन्होंने फिल्म के लिये जायरा जैसी बेहतरीन अभिनेत्री को ही नहीं जांचा परखा बल्कि अपने मैनेजर अद्वैत चंदन में छुपे डायरेक्टर को पहचान उसे इस फिल्म में ब्रेक भी दिया। चंदन भी उनकी उम्मीद पर खरे साबित हुये। लगता ही नहीं कि ये उनकी पहली फिल्म है। एक एक सीन पर उनकी पकड़ देखते बनती है, वे जितनी कुशलता से दर्शक को हंसाते हैं उसी शिद्दत से रूलाते भी हैं। एक साधारण सी कहानी को उन्होंने इतने अलग तरीके से दर्शाया है कि ये आपके आस पास की सच्ची कहानी दिखती है। फिल्म हर उस नौजवान को इंस्पायर करती है जो कुछ बनने का सपना संजोये हैं। फिल्म उन पेरेन्ट्स के लिये भी है जो अपनी जिद्द और रूढिवादिता के तहत अपने बच्चों के सपनों का गला घोट देते हैं।

फिल्म की नायिका जायरा वसीम अभिनय के मामले में अपनी फिल्म ‘दंगल’ से मीलो आगे निकल गई है। उसके लिये आमिर का कहना गलत नहीं कि वो मुझसे भी बेहतरीन अभिनेत्री है। खुद आमिर खान के बारे में क्या कहा जाये। इस बार उन्होंने एक ऐसे किरदार को निभाया है जो उनसे बिलकुल उलट है यानि वो बुरा है खाम ख्याल है, अपनी बढ़ाई करने वाला और दूसरों की बुराई करने वाला एक छिछोरा टाइप शख्स है। इस किरदार में वे जो करते हैं उससे साफ झलकता है कि उन्होंने कितना अरसा इस किरदार को लेकर मंथन किया होगा। यही नहीं एक पड़ताड़ित पत्नि के तौर मेहर विज ने बहुत अच्छा काम किया है तथा एक क्रूर, रूढ़िवादी पति के किरदार को राज अर्जन ने कुशलता से अंजाम दिया, वहीं जायरा के भाई के तौर पर तीर्थ शर्मा तक बेहतरीन अभिनय कर गया।

इस साल की इस बेहतरीन फिल्म के लिये मेरा दावा है कि शायद ही कोई दर्शक इसे मिस करेगा।

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