हम किसी से आधा अधूरा प्यार नहीं करते- सारा अली खान  

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सारा अली खान की फिल्म,’ केदारनाथ” काफी समय से विवादों में फंसी रही। सारा की यह डेब्यू फिल्म है और जाहिर सी बात है जब कोई भी अपने जीवन में,किसी भी  पेशेवर क्षेत्र में प्रवेश करता है तो उत्सुकता के साथ-साथ थोड़ा भय भी रहता है. केवल 21-22 वर्षीय सारा की डेब्यू फिल्म जब कुछ समय के लिए डामा- डोल स्थिति में रही तो सब यही  सोच रहे थे कि-क्या यह फिल्म रिलीज़ हो पायेगी?  तो आप सोचिये सारा की मनोस्थिति कैसी रही होगी। सारा अली एक जाने माने पटौदी परिवार से बिलोंग करती है। पापा  सैफ अली खान और माँ अमृता सिंह की जेष्ठ सुपुत्री है। दादी  शर्मीला टैगोर भी 80 के दशक की  एक जानी मानी अभिनेत्री रही है। ज़ाहिर सी बात है सारा का पूरा का पूरा परिवार अभिनय क्षेत्र से ही   बिलोंग करता है, सो सारा  भी एक अच्छी अभिनेत्री ही होगी?? पर इसके लिए हम सब को सारा की डेब्यू फिल्म, ‘केदारनाथ’  के रिलीज़ होने का इंतज़ार रहा का।

पेश है सारा अली खान के साथ  लिपिका वर्मा की बातचीत के कुछ अंश

आपकी डेब्यू फिल्म के बनने से लेकर रिलीज़ होने तक आपकी मनोस्थिति कैसी रही?

जब हमें सारा से पहली  बारी मिलने का मौका मिला तो सुनिए सारा का इस बारे में क्या कहना है,” मुझे पूरा विश्वास था कि सब कुछ ठीक हो जायेगा। हम सब ने  बहुत ही ईमानदारी और मेहनत  से इस फिल्म में काम किया है। दरअसल मुझे कुछ भी अंदाज़ा नहीं था कि मेरी डेब्यू फिल्म, “केदारनाथ” का क्या होगा??वैसे 80% मुझे विशवास था कि सब कुछ अच्छा ही होगा। किन्तु झूठ  नहीं कहूँगी लगभग 20% तो मुझे भी अंदर से बहुत भय लग रहा था। क्योंकि  मेरी यह पहली फिल्म है और अपनी पहली फिल्म की रिलीज़ को लेकर थोड़ा  परेशान जरूर थी मैं। इस फिल्म में काम करना बहुत ही प्यारा अनुभव रहा और इस फिल्म में मै बहुत रोई भी। थोड़ा भय था यही  सोच कर -क्या यह फिल्म पूरी हो पायेगी  ?   बस ईमानदारी से काम करना मेरा मकसद रहा। और यही  चाहत भी है कि अपनी ऑडियंस को एंटरटेन कर सकूं। पर  मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता फिर चाहे  आप मुझे -पहाड़ो पर रोता हुआ देखना पसंद करेंगे ? या फिर रणवीर सिंह के साथ नेहा कक्कड़ के गाने पर डांस करते हुए.??बस यही चाहूंगी -मेरी दोनों फ़िल्में, “केदारनाथ” और “सिंबा”  देखने आप जरूर जाये। “

यह कहना ज्यादा नहीं होगा -आप अपनी माताजी अमृता सिंह की डेब्यू फिल्म “बेताब” की तरह ही लग रही है ? क्या कहना चाहेंगी आप ?

यह मेरे लिए सचमुच बहुत ही बड़ा कॉम्पलिमेंट (प्रशंसा) है। हर समय जब मुझे यह कॉम्पलिमेंट मिलता है तो मुझे बहुत ही ख़ुशी मिलती है। क्योंकि मुझे मालूम है मेरी माँ बेहद खूबसूरत है। 

पापा सैफ अली खान और माता अमृता के क्या गुण  अपने आप में पाती है आप?

सही मायनों मै उन दोनों का मिश्रण ही हूँ। मैं उन दोनों की तरह (क्रेजी) पागल हूँ। बस उन दोनों से थोड़ा ज्यादा पागल हूँ (हंस पड़ी) मेरे पिताजी बहुत ही संतुलित ढंग से अपना कोई भी निर्णय लेते है। भावनात्मक  रूप से मैं बिल्कुल अपनी माँ की तरह ही हूँ। हम दोनों किसी  से जल्दी जुड़ते नहीं है। लेकिन यदि जुड़ते है तो पूर्ण रूप से जुड़ जाते है। बस आधा अधूरा प्यार किसी  से कभी नहीं करते है।

सारा का बचपन कितना संरक्षित  रहा?

मेरा  बचपन बहुत ही संरक्षित रहा क्योंकि  मेरा बचपन  मेरी माँ के साथ  ही गुजरा है। लगभग 13-14 साल हो गए है जब मेरे माता- पिता ने तलाक ले लिया था। मेरी माताजी बतौर एक सिंगल मदर-इब्राहिम और मुझे अपने संरक्षित पंखो तले रख बहुत ही बेहतरीन ढंग से पाला  पोसा। मैंने जीवन में कुछ भी मिस नहीं किया है। सिर्फ इसलिए -जो कुछ भी मांग हमने की वह हमारी  माताजी ने पूरी की। मैंने हमेशा दिल्ली की शंकर मार्किट से ही अपने कपड़े खरीदे है। हाल ही में हैदराबाद  की चार मीनार मार्किट से ढेर सारी  मार्किट की है मैंने। में कभी भी 1000 रुपयों – के ऊपर पैसे, कुर्ते  खरीदने में खर्च नहीं करती हूँ। मेरी माँ ने हमेशा से मेरी ख्वाईश पूर्ण की है बस अभी मुझे कहती है-जो कुछ तुम चाह रही हो, वही मेरी भी चाहत  है किन्तु तुम्हारी इस चाहत को में अब पूरी  नहीं कर पाऊँगी। इसके लिए तुम्हे ही  मेहनत  एवं कोशिश करनी होगी। यह सुन कर मुझे अत्यंत दुःख भी होता है। हमें जो भी चॉकलेट मेरी माँ  ने दिए है वह मेरी चाहत नहीं थी। अब मेरी ये इच्छा है – जो मुझे चाहिए वह मुझे दे पाए पर ऐसा हो पाना  असम्भव है। और उनकी यह सोच मुझे दुखी कर  देती है। क्योंकि में उन्हें दुखी नहीं देख सकती हूँ। यह उनका प्यार ही तो है। मुझे इस बात का एहसास दुखी कर  देता है। 

क्या सारा हमेशा से एक एक्टर/स्टार ही बनना चाहती थी?

जी बिलकुल, मै हमेशा से ही एक्टर  बनने की ख्वाईश रखती थी। हालाँकि, मै बहुत पढ़ाकू किस्म का व्यक्तित्व भी रखती हूँ। मेरे माता पिता दोनों चाहते  थे कि हम अपनी पढ़ाई पूरी करे और उसके बाद कुछ भी प्रोफेशन अपना ले।  मै  न्यूयॉर्क में वकालत की पढ़ाई करने भी गयी थी। वहां पहुंच कर मैंने इतिहास, भूगोल और गणित पढ़ना चाहा। पर कुछ समय बाद मुझे लगने लगा की मुझे एक्टर ही बनना है। लेकिन पढ़ाई से मेरा मोह अभी भी है। हाल ही में और इब्राहिम नेशनल आर्ट म्यूजियम गए हुए थे। वहाँ   8 घंटे कैसे बीत गए,मुझे  मालूम ही नहीं पड़ा। जब मैं म्यूजियम से बाहर आयी तो इब्राहिम ने मुझे कहा -अब तो तुम एक अभिनेत्री बन गयी हो तो अब क्यों इतनी रूचि पढ़ाई में? मेरा  सिंपल जवाब था-क्योंकी मुझे एक बेहतरीन ह्यूमन बीइंग बनना है।

अपने  फिल्मों में एंट्री ली इस पर आपके पिता जी, की प्रतिक्रिया क्या रही?

मेरे पिताजी ने शुरू से ही मेरे जीवन के उतार- जुड़ाव के समय मुझे  बहुत सपोर्ट किया है। शुरू से ही दोनों मेरे माता-पिता ने मुझे समय समय पर बेहद प्यार और अपना समर्थन दिया है। फिल्मी दुनिया का हिस्सा है दोनों सो वह अच्छी तरह से जानते है हम अभिनेताओं पर क्या गुजरता है।  मैं यदि एक गेंद के सतह खेलती हुई नजर आउंगी तो भी वह दोनों मुझे बेहद पसंद करेंगे। दोनों बेहद उत्सुक है इस समय। में कुछ भी करूँ उन्हें अच्छा लगेगा।

आप बहुत कॉंफिडेंट है, इस बारे में क्या कहना चाहेंगी आप?

देखिये में कभी भी चीटिंग नहीं कर सकती हूँ। आज यदि में (फेक) आपको उल्लू बनाऊं और कल आप सच जान जाये तो आप क्या सोचेंगे मेरे बारे में। मै  जैसी हूँ वैसी ही रहना चाहती हूँ। बस हार्ड वर्क करूंगी और अपने आप को झूठ बोल कर  आपको फेक साबित नहीं करना चाहती हूँ।

बचपन आप अपने मम्मी -पापा के फिल्म सेट पर कभी गयी थी ?

जी में फिल्म,’ कलयुग” के सेट पर गयी थी पर उस समय में बहुत छोटी थी। जब आप सेट पर बैठे रहते हो  तो बेहद बोर हो जाते हो । हाल ही में मेरा भाई इब्राहिम जब सेट पर पहुंचे थे तो मुझे बार-बार वही सीन करते हुए देख मुझ से पूछने लगे -आप वही चीज़ बार बार क्यों कर रही है? में फिल्म ,’ केदारनाथ ” के सेट पर मेरा पहला दिन यही  सोच कर बीता कि सुशांत सिंह राजपूत बार-बार वही चीज़ क्यों कर रहे है। जब दूसरे दिन मुझे वही करना पड़ा तब जाकर फिल्म की तकनीक मुझे समझ आयी। 

इस वर्ष जान्हवी कपूर ने फिल्म धड़क से डेब्यू किया है -आप भी डेब्यू कर रही है। क्या कुछ प्रेशर है क्योंकि जान्हवी की फिल्म “धड़क” बॉक्स ऑफिस पर हिट हुई है ?

बिल्कुल भी नर्वस नहीं हूँ. हर एक की अपनी जर्नी होती है। उनकी फिल्म हिट हुई है और मेरी फिल्म रिलीज़ पर है इन सब बातों से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। बस ईमानदारी से काम करना है और वही कर रही  हूँ। जान्हवी ने बेहतरीन प्रदर्शन दिया है अपने फिल्म,’ धड़क ‘ से। अच्छा लगता है उन्हें बेहतरीन काम करते देख कर।

हाल ही में तैमूर के साथ राखी का त्यौहार मनाना कैसा लगा?

बहुत अच्छा लगा। उन्होंने मुझे 51 रुपए दिए.वह अभी बहुत छोटे है। और इब्राहिम ने मुझे 101/- रूपये दिए मुझे ख़ुशी हुई दोनों के साथ राखी का  पवन त्यौहार मनाया मैंने।

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