मूवी रिव्यू: मास की फिल्म ‘मि.कबाड़ी’

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रेटिंग**

अनूप जलौटा द्धारा प्रोड्यूस और सीमा कपूर द्धारा निर्देशित फिल्म ‘मि.कबाड़ी’ में कॉमेडी के तहत एक ऐसे शख्स के जरिये अपनी व्यथा बताने पर आधारित है जो सुलभ शौचालय का कॉन्ट्रेक्टर है।

अनु कपूर कबाड़ी के धंधे से करोड़पति बना चुका है उसकी बीवी सारिका कभी कचरा बीनने का काम करती थी। अब वह सुलभ शौचालय के कांट्रेक्ट लेता है। उसका बेटा उसका पूरा धंधा संभालता है। अनु कपूर अब अभिजात्य वर्ग में अपनी जगह बनाना चाहता है। उसका बेटा एक पंजाबी बिजनेसमैन बिजेन्द्र काला कबाड़ी  की बेटी से प्यार करता है लेकिन काला कबाड़ी समाज से नफरत करता है, क्योंकि अनु कपूर का साला उसकी बहन को भगाकर शादी कर चुका है। उसके बाद की कहानी में अंत तक किरदारों के बीच रस्साकसी चलती रहती है।

फिल्म की डायरेक्टर सीमा कपूर ने सुलभ शौचालय के अलावा ऊंच नीच को लेकर कहानी घढ़ी है। लेकिन अपनी बात बहुत ही सस्ती कॉमेडी के तहत कही है। फिल्म में तकरीबन सभी बेहतरीन कलाकार हैं लेकिन उन सभी का सही फायदा नहीं उठाया गया। फिल्म की कहानी अच्छी है लेकिन पटकथा लचर। बड़े कलाकारों ने अपने अनुभवों के तहत अपनी अपनी भूमिकाओं को बढ़िया तरह से अंजाम देने की भरपूर कोशिश की है इसलिये दर्शक बोर नहीं हो पाता।

अनु कपूर, सारिका, विनय पाठक तथा ओम पुरी जैसे कलाकारों ने फिल्म को शुरू से अंत तक संभाले रखा। नई जोड़ी राजवीर और कशिश बोरा अच्छे लगते हैं। इसके अलावा कई सितारे जैसे तुषार कपूर, परिणीति चोपड़ा आदि भी एक झलक दिखा जाते हैं।

फिल्म में बड़े कलाकारों के अलावा सारे मसाले मौजूद हैं लिहाजा इसे मास की फिल्म कहा जा सकता है।

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