अबीर और बाइजा मां ने दिल्ली के सांई बाबा मंदिर में किया महासप्ताह का प्रमोशन

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इस साल शिरडी में सांई बाबा के समाधि लेने की यादगार घटना के 100 वर्ष पूरा हुए हैं। पिछले 100 सालों में, उनका संप्रदाय कई गुना बढ़ गया है, उनके संदेश और शिक्षा उनके लाखों अनुयायियों के लिए रोशनी लाई हैं।

सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के ‘मेरे सांई’ ने एक समाविष्ट करने वाले स्क्रीनप्ले के प्रारूप में सांई की जिंदगी के सफर की अपने बेहद रिसर्च की गई और यथार्थ कहानी के लिए, बेहद कम समय में बहुत ज्यादा प्रसिद्धि हासिल कर ली है और देश भर में कईयों के जिंदगियों को छुआ है। आने वाले एपिसोड्स में ‘ईमानदार कोशिशों से अच्छे परिणाम मिलते हैं’ के संदेश के साथ ‘जल से जल उठे दीये’ के सांई के सबसे प्रसिद्ध चमत्कारों में से एक दिखाया जाएगा।

एक खास ‘महासप्ताह’ दिखाया जाएगा

सांई के इस यादगार चमत्कार और शिक्षा का जश्न मनाने के लिए, #मेरेसांईकीयात्रा के साथ, प्रमुख कास्ट सांई (अबीर सूफी) और बाइजा मां (तोरल रसपुत्रा) अपने गंतव्य पर पहुंचे, जो लोधी रोड पर प्रसिद्ध सांई बाबा मंदिर था। इस संदेश का प्रचार और प्रसार करने के लिए इन कलाकारों ने अपने फैंस और कई सांई भक्तों के साथ दीये जलाएं, जिसके बाद संध्या आरती भी की गई। इस यात्रा का पहला पड़ाव प्रसिद्ध शिरडी मंदिर में दर्शन करने से शुरू हुई थी और यह अब देश भर के अन्य शहरों में ले जाई जाएगी। इस शो में एक खास ‘महासप्ताह’ दिखाया जाएगा जो 15 जनवरी से 19 जनवरी 2018 तक चलेगा। गुरुवार को सांई दिवस के रूप में प्रसिद्ध होने की वजह से, सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन में हर गुरुवार को एक खास ‘सांई वार’ होगा।

श्रद्धा और सबुरी के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में कुछ भी पा सकता है

आने वाले एपिसोड्स में, दर्शक देखेंगे कि झिपरी दिवाली मनाने के लिए उत्साहित है लेकिन कोई भी उसकी मदद करने के लिए तैयार नहीं है। इसलिए, वह ऐसा करने के लिए खुद ही अपनी मदद करती है। यह नन्ही लड़की उपले बनाती है और कुछ धन कमाने के लिए उन्हें बेच देती है लेकिन जब दुकानदार उसे तेल देने से मना कर देता है तो उसका दिल टूट जाता है। उसके प्रयासों की ओर देखते हुए, सांई भी कुछ तेल पाने के लिए इस नन्ही लड़की के साथ शामिल हो जाते हैं लेकिन केवल एक बूंद तेल लेकर ही वापस आते हैं। अचानक एक चमत्कार होता है और पूरी बस्ती दीयों की रोशनी से जगमगा जाती है, जो पानी में मिलाई गई तेल की उस एक बूंद से जलाए गए थे। यह वाकया हमें बताता है कि श्रद्धा और सबुरी के माध्यम से, व्यक्ति अपने जीवन में कुछ भी पा सकता है और अपनी कोशिशों में वह हमेशा ही सांई को अपने साथ उनका सहयोग करते हुए पाएगा।

दर्शक अपने पसंदीदा एक्टर्स अबीर सूफी और तोरल रसपुत्रा से आमने-सामने मिलकर उल्लासित थे और सम्मान से भर गए थे।

बेहद उल्लासित अबीर सूफी ने कहा, “सांई हमेशा से ही अपनी आध्यात्मिक शिक्षा के लिए जाने गए हैं जिसने दुनिया भर में लाखों की जिंदगियों को प्रेरित किया और छुआ है। इतने सारे सांई भक्तों का हमसे अपने अनुभवों और चमत्कारों की कहानियां साझा करना काफी अच्छा अनुभव रहा है। यह एक संपन्न अनुभव था।”

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