बॉलीवुड ने पहले ही नकारा है गॉडमैन- स्वामी और बाबाओं को

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गुरमीत राम रहीम इंसान का एक परिचय फिल्मों से भी है। आज सारा देश उनकी चर्चा कर रहा है, हम उनकी और उनके जैसे संतों की फिल्मों की चर्चा करना चाहते हैं हमारे फिल्मी-रूचि वाले पाठकों के लिए। जानते हैं राम रहीम ने पांच फिल्में बनाई है 92 करोड़ रूपए खर्च करके, जो सबकी सब फ्लॉप हुई हैं। ये फिल्में है MSG-Message of God, MSG-2, MSG the Varior-Lion heart, ‘हिन्द का नापाक को जवाब’- (Maa-Lion heart) और ‘जट्ट इंजीनियर’ ज्यादातर फिल्मों के शीर्षक अंग्रेजी में लिखे गये हैं और उनकी पिछली फिल्म में 30 क्रेडिट में नाम बाबा राम रहीम का है। मजे की बात है धड़ाधड़ 2 साल में पांच फिल्में देने वाले इस ‘गुरमीत राम रहीम’ की फिल्मों को दर्शकों ने पूरी तरह नकार दिया। न किसी फिल्म ने उनको पैसा वसूल करके दिया और ना ही वे बॉलीवुड में एक सितारा बन कर उभर पाए। लेकिन उनकी टीम के मुताबिक सभी सुपर हिट हुई हैं।

बॉलीवुड ने हमेशा ही गॉडमैन स्वामी और बाबाओं की तस्वीर को पर्दे पर नकारात्मक रूप में पेश किया है। बहुत पहले महेश भट्ट जब रजनीश के आश्रम से वापिस आए थे, उसके कुछ समय बाद एक ‘भगवान छाप’ बाबा की विषयवस्तु पर फिल्म बनाए थे, जो प्रदर्शित नहीं हो पायी। फिल्म के स्वामी को एक जघन्य-बीमारी का शिकार हो गया बताया गया था जो सेक्स प्रवचन का सरोकारी था। जाहिर था कि फिल्म भगवान रजनीश को आधार देकर बनाई गई थी। पिछले दिनों राधे मां को आधार बनाकर कई फिल्में बनाई गई- जिसमें स्वामिनी को अय्याश रूप में पेश किया गया है। ये फिल्में प्रदर्शित ही नहीं हो पायी। इसी तरह की और बहुत सी फिल्में बनी और थिएटर से उतर गई, जिनमें स्वामी या बाबा खलनायक भूमिका में थे। ‘ग्लोबल बाबा’ (अभिमन्यु सिंह बाबा बने थे), ‘चल गुरू हो जा शुरू’ (हेमंत पांडेय की गुरूबाई), ‘कुक्कू माथुर की झंड हो गई’ (बीजेन्द्र कालरा), ‘बुड्ढा मर गया’ (ओमपुरी गुरू की भूमिका में थे), ‘जुल्म की हुकूमत’ (परेश रावल डॉन-जो गॉडफादर थे), ‘जादूगर’ (अमिताभ अभिनीत फिल्म – जिसमें अमरीश पुरी की भूमिका बाबा की थी) आदि ऐसी ही फिल्में थी जिनको दर्शकों और बॉलीवुड के लोगों ने निगेटिव रूप में ही स्वीकारा था।

कहते हैं सिनेमा समाज का दर्पण है। सिनेमा के दर्पण में राम रहीम, रामपाल, आशाराम, राधे मां… जैसी महान आत्माओं (कथित) को देश की अंधभीरू जनता भले सर माथे चढ़ाए, फिल्मकारों ने हमेशा उनको निगेटिव रूप में ही दिखाया है। फिल्म ‘सावन…द लव सीजन’ में सलमान खान भगवान से बातें करते हैं। फिल्म ‘पीके’ (आमिर खान स्टारर) में सौरभ शुक्ला एक चमत्कारी बाबा हैं। ‘सिंघम रिटर्न’ (अजय देवगण की फिल्म) में अमोल गुप्ते वैसी ही भूमिका में हैं। ‘OMG. ओइ माय गॉड’ में मिथुन चक्रवर्ती की भूमिका थी। परेश रावल और गोविन्द नामदेव स्वामी रूप में थे। तात्पर्य यह है कि बॉलीवुड में हमेशा-शौकीनों को पसंद आया है ऐसा विषय। काश! हमारे देश की भोली’भाली जनता भी इस सच को समझ पाती!!

संपादक

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