मैं घर और प्रोफेशन दोनों में बहुत बेहतरीन ढंग से बैलेंस कर लेती हूँ- अनुष्का शर्मा

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लिपिका वर्मा

अनुष्का शर्मा अपने तर्क पर अमल करती है यह बात हम बहुत अच्छी तरह जानते हैं। उनके पहले बेबाक इंटरव्यू से ही हम यह जान चुके थे कि अनुष्का अपने विचारों को लेकर बहुत ही स्पष्ट रहती है। खैर अब जबकि उनकी शादी विराट कोहली से हो चुकी है, और आज भी अपने प्रोफेशन को लेकर वह खुद ही निर्णय लेती है। इस बात का स्पष्टीकरण अनुष्का ने बहुत ही बेहतरीन ढंग से इस बातचीत में भी किया है। किस तरह प्रोफेशन और शादी शुदा जीवन में अनुष्का बैलेंस रखती है जानिए …

पेश है अनुष्का शर्मा के साथ लिपिका वर्मा की बातचीत के कुछ अंश

वर्ष 2018 आपके लिए कैसा रहा ?

यह वर्ष मेरे लिए अभूतपूर्व रहा। इस वर्ष मुझे तीन फिल्मों में काम करने का मौका मिला-संजू को यदि गिने तो फिर चार फिल्मों में काम किया है मैंने। इन सब में अलग किरदार निभाये हैं और हर किरदार की प्रशंसा भी हुई है। फिल्म ‘परी’ और ‘सुई धागा’ ने भी लोगों का बहुत मनोरंजन किया है। यदि परफॉर्मेंस देखी जाये तो उसकी भी प्रशंसा की गयी है। फिल्म ‘जीरो’ के ट्रेलर को भी लोगों ने बेहद पसंद किया है सो मैं खुश हूँ।

फिल्म ‘जीरो’ में मष्तिष्क पक्षाघात से ग्रस्त बीमारी से पीड़ित किरदार को करने में कितनी दिक्कत हुई आपको?

इस किरदार को करने के लिए मेरी जिम्मेदारियां बढ़ गयी थी। मुझे इस किरदार को सही ढंग से करना था। इस किरदार की अवस्था, सीमाओं के मद्देनजर रखते हुए मुझे यह किरदार करना था। हिमांशु जो कि इस फिल्म के राइटर है उन्होंने मुझे बहुत अच्छी तरह गाइड किया। मैंने किसी ख़ास मरीज से मुलाकात नहीं की। इसका एक स्पष्ट कारण  है – इस बीमारी से ग्रस्त हर व्यक्ति की अपनी कमजोरियां होती हैं। सो मैं किसी एक को फॉलो नहीं कर सकती थी। हाँ मैं एक डॉक्टर से जरूर मिली थी। और व्यवसायिक चिकित्सक के साथ लग़भग 3/4 महीने काम भी किया है। 

पहली बार व्हील चेयर पर अभिनय करना, क्या कुछ चल रहा था मष्तिष्क में ?

– समझो एक व्यक्ति के जीवन में जैसे कारावास का आभास होता है, सो मेरा यह रील चरित्र चित्रण भी कुछ उसी तरह हो जाता है, एक व्यक्ति के लिए शारीरिक बंदिशें भी हो जाती है। मैं जैसे ही सेट पर पहुँचती बस तुरंत व्हील चेयर पर बैठ जाती। सारा दिन उस पर ही बैठी रहती ताकि मुझे एहसास हो कि मुझे एक दायरे में ही रह कर अभिनय करना है।

आपको अलग अलग किरदार में अभिनय करने से भय लगता है क्या?

बतौर अभिनेता मैंने हमेशा से ही अलग अलग किरदार चुने हैं और अपने आप को खुद ही चुनौती दी है। ऑडियंसेस को यह महसूस होना चाहिए कि मैंने अपने आप को हमेशा एक नए अंदाज़ में पेश करने की कोशिश की है। बस इन किरदारों को चुन परदे पे पेश करने के लिए दर्शकों ने प्रशंसा की है, यही कि  मेरी च्वॉईस सही है इस बात की पुष्टि करती है।

निर्देशकों ने आप को हमेशा अलग अलग किरदारों के लिए चयन किया है, क्या कहना चाहेंगी आप ?

ख़ुशी होती है, चाहे फिर वो कोई प्रयोगात्मक किरदार हो -जैसे फिल्म ‘परी’ या फिर कमर्शियल रोल हो, ’सुई धागा’ फिल्म या अब ‘जीरो’ फिल्म जिस में एक मंझे हुए कलाकार की जरूरत होती है, और निर्देशक यह सोचते हैं – मैं यह किरदार सही ढंग से कर पाऊँगी। और मुझे चुनते हैं उस रोल के लिए तो जाहिर सी बात है, मुझे ख़ुशी मिलती है।

बतौर निर्माता अब कौन-सी फिल्म बना रही है आप ?

हम बहुत जल्द अमेज़न पर एक शो बनाने की तैयारी में जुटे हुए हैं। और नेटफ्लिक्स पर एक फिल्म की तैयारी भी कर रहे हैं। मुझे अलग अलग कंटेंट बनाने से अत्यंत ख़ुशी भी होती है। और मैं इन सब में बतौर क्रिएटिव ही अपना इनपुट दे रही हूँ। आप इन सब में मुझे अभिनय करते हुए नहीं देखेंगे।

आपने अपनी पहली फिल्म ’रब ने बना दी जोड़ी’ से फ़िल्मी दुनिया में पदार्पण किया था- और इस को दस साल हो चुके हैं। अब शादी भी हो गयी है। किस तरह बैलेंस करती है दोनों में ?

हर कामकाजी महिला की तरह मेरे लिए भी काम और शादी शुदा जीवन में, एक नार्मल महिला की तरह ही दोनों में बैलेंस करना है। मैंने अपनी शादी के दो दिनों पहले फिल्म ‘जीरो’ में काम शुरू किया था। उसके तुरंत बाद फिल्म ’सुई-धागा’ की शूटिंग में व्यस्त हो गयी थी। क्योंकि अन्य कामकाजी महिलाओं की तरह ही मुझे भी अपने प्रोफेशन से प्यार है तो जाहिर सी बात है मैं दोनों बहुत बेहतरीन ढंग से बैलेंस कर लेती हूँ। 

शर्मीला जी ने भी एक बार हमसे कहा था पटौदी साहब और उनके परिवार से सपोर्ट मिला इसीलिए ‘मौसम’ जैसी फ़िल्में भी कर पायी। आप को अपने पति विराट से कितना सपोर्ट मिलता है ?

साधारण सी बात है मैं बहुत ही स्वतंत्र विचारों की महिला हूँ। और पिछले 14 वर्षों से काम कर रही हूँ। यह प्रोफेशन मेरी ज़िंदगी है। सो अपने काम के लिए मैं खुद निर्णय लेती हूँ। वो (विराट) भी अपने निर्णय प्रोफेशनल मामले में खुद ही लेते हैं। हम एक दूसरे के काम के आड़े नहीं आते हैं। हम एक दूसरे को उतना ही सपोर्ट भी करते हैं। सो काम के जो कुछ भी निर्णय होते हैं वह हमारे अपने होते हैं। मैंने हमेशा से ही चुनौतीपूर्ण किरदार ही किए हैं।

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