आज कल दीवाली वह दिवाली नहीं रही जो पहले होती थी                                                    

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दीवाली खुशियाँ मानाने और तोहफे बाँटने का त्यौहार है, जिसमे लोग बड़ा दिल रखकर एक दूसरे की गलतियों को भूलकर माफ़ कर देते है। दिवाली के त्यौहार को देश का गरीब इंसान भी पूरे जोश से मनाता है। हर साल फिल्म इंडस्ट्री दिवाली पर पैसों के रजिस्टर भरने के लिए तैयार रहती है लेकिन ज़रा सोचिये की क्या दिवाली के त्यौहार पर फिल्मों में फिल्कारों ने कभी कुछ दिखाया है? दिवाली देश में होली, गोकुलअष्टमी और नवरात्री के जैसा सबसे बड़ा त्यौहार है। बाकी त्योहारों को फिल्मों, टेलीविज़न सीरियल में भरपूर मात्रा में दिखाया जाता है लेकिन दिवाली को कभी भी किसी फिल्म की कहानी में नहीं दिखाया गया। फिल्म में दिवाली के शायद ही कुछ सीन होते है।

दीवाली को दिमाग में रखकर चालीस और पचास दशक के शुरुवात में कुछ फिल्में बनायीं गयी। 1940 में जयंत देसाई ने फिल्म दीवाली को बनाया था। 1956 में गायक तलत मेहमूद को बतौर हीरो लेकर फिल्म “दीवाली की रात” बनायीं गयी। उसी समय गजानन जागीरदार ने फिल्म “घर घर में दिवाली” बनायीं। उसके बाद से दीवाली का विषय लेकर किसी ने फिल्म नहीं बनायीं। अमिताभ बच्चन कारपोरेशन लिमिटेड ने आमिर खान और रानी मुख़र्जी को लेकर फिल्म ” हैप्पी दीवाली” के प्रोडक्शन की शुरुवात का एलान किया था लेकिन अब यह फिल्म कभी नहीं बनेंगी।

हालाँकि दीवाली के कुछ दृश्यों को फिल्मों में ज़रूर दिखाया जाता है, जैसे फिल्म चिराग में आशा पारेख पटाखों के कारन अपनी आँखें खो देती है। फिल्म चाची 420 में कमल हसन की बेटी को रॉकेट लग जाता है और वह जल जाती है। इस फिल्म में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक बात बताई गयी है, जो ज़्यादातर लोगों को पता नहीं है कि अगर आप किसी प्रकार से भी जल जाये तो जाली हुई जगह पर तुरंत पानी डाले।

माधुरी दीक्षित और दूसरे सितारें भी टीवी पर सुरक्षित दिवाली के लिए जागरूकता फैलाते रहे है। अभी भी इसी प्रकार के जागरूकता वाले विज्ञापन दिखने चाहिए क्योंकि अभी भी 10 प्रतिशत लोगों को जलने के बाद फर्स्ट ऐड के बारे में जानकारी नहीं होती। फिल्म “कभी ख़ुशी कभी गम” में रायचंद (अमिताभ बच्चन) के घर में दिवाली की पूजा का एक दृश्य दिखाया गया है जिसमें पैसों की देवी लक्ष्मी के स्वागत की पूजा की जाती है। फिल्म “हम दिल दे चुके सनम” में समीर (सलमान खान) अपने गुरु (विक्रम गोखले) के घर दिवाली वाले दिन संगीत सिखने के लिए आता है। फिल्म श्री 420 में राज कपूर और रामगोपाल वर्मा की फिल्म सत्या में सत्या चक्रवर्थी अपनी गर्लफ्रेंड को  मुंबई में दिवाली की धूम दिखाने के लिए लेकर जाते है।


दीवाली के विषय पर कई गाने भी बनाये गए है। 1943 में अमीरबाई ने फिल्म “किस्मत” के लिए गाना “घर घर में दिवाली है…” गाया था जिसका संगीत अनिल बिस्वास ने दिया था। 1949 में शमशाद बेगम ने फिल्म “शीश महल” के लिए “आई रे आई रे दिवाली” गाया था। 1944 की फिल्म “रतन” के लिए नौशाद द्वारा बनाये गए गाने “आई दिवाली, आई दीवाली” को ज़ोहराबाई ने गाया था। 1960 में राज कपूर और वैजयंतीमाला स्टारर फिल्म “नज़राना” के लिए मुकेश ने “एक वो भी दिवाली…” गाया था। शिरडी के संत साई बाबा की ज़िन्दगी पर बनी फिल्म “शिरडी के साई बाबा” में एक मशहूर गाना ” दीपावली मनाये सुहानी” है। 1949 में सुरैया ने गाना “दीवाली की रात पिया घर” को फिल्म “अमर कहानी” के लिए गुनगुनाया था । फिल्म “गाइड” में दिवाली के दिन पर गाना “पिया तो से नैना लागे रे…” में दीवाली का अंतरा बनाया गाया था। हालाँकि दिवाली पर बने सभी गाने ख़ुशी और त्यौहार के जज़्बे को नहीं दर्शाते है। एक मशहूर गाना “लाखों तारे आसमान पे, एक मगर ढूंढ़ने से न मिला, देख के दुनिया की दीवाली, दिल मेरा चुप चाप जला…” फिल्म “हरियाली और रास्ता” में मुकेश ने गाया था। आज कल जो दीवाली का गाना जो याद आता है, वह हैं फिल्म “आमदनी अथनि खर्चा रुपैया” का “आयी हैं दिवाली…।”
आज की पीढ़ी के युवाओं को दिवाली की विशेषता के बारे में नहीं पता होगा। चतुर्दशी के दिन नरकासुर नाम के राक्षस का टूटना और आखिरी इच्छा की पूरी दुनिया उसकी मौर को लाइटों और आवाज़ से मनाये, का महत्त्व युवाओं को समझ नहीं आएगा। ऐसे में फिल्में काफी मदद कर सकती है। एक तो वह इस त्यौहार के बारे में सांस्कृतिक जागृत दे सकती है, दूसरा पटाखों के खतरों को दर्शा सकती है और तीसरा इस त्यौहार की अच्छाई और गर्मजोशी को बता सकती है, जिसकी हमारे देश को आज बहुत ज़रुरत है। चौथा यह की हमारे कानों के लिए ऊँची आवाज़ वाले पटाके कितने खतरनाक है, को लोगों को बता सकती है और पांचवा की इस त्यौहार को ख़ुशी के साथ मनाना चाहिए। हर साल दिवाली पर होने वाला धुआँ अस्थमा के मरीज़ों और वृद्ध लोगों के लिए खतरनाक साबित होता है। हर साल दिवाली पर मालिकों को बोनस के मुद्दों से डर भी लगता है। हर साल दिवाली के मौके पर मुंबई म्युनिसिपल कारपोरेशन बोनस के लिए लड़ते है और इस वजह से पूरे शहर में कूड़ा इकट्ठा हो जाता है और बदबू फ़ैल जाती है। इस प्रकार के मुद्दों को हमारी फिल्मों में दिखाया जाना चाहिए। इस त्यौहार पर एक और चीज़ जो परेशानी देती है वह हैं बक्शीश। दिवाली के रंगो, लाइटों और आवाज़ में खूबसूरत कपड़े और गहनों से लदी महिला और गर्मजोशी में पुरुषों के साथ कई कहानियां बनायीं जा सकती है जिसमें जलन, लालच, धोखा, हिंसा, रोमांस और दुःख को दिखाया जा सकता है । दिवाली के समय में कई चीज़ों पर जुआ भी खेला जाता है और बॉलीवुड के कई कलाकारों ने इस जुए में काफी कुछ खोया भी है। यह सभी विषय फिल्मों के लिए कई विषय देती है।

आज जब हमारा देश बम, राजनेताओं की राजनीती, नक्सलवदीओ के हमले, जाती हिंसा से घिरी हुई है, ऐसे में दिवाली के त्यौहार से देश में शांति लानी चाहिए। आखिर में 1964 की फिल्म “हकीकत” में लता मंगेशकर द्वारा गाया हुआ गाना याद आता है। इसके बोल कैफ़ी आज़मी ने लिखे थे और इसका संगीत मदन मोहन ने दिया था। इसके बोल है:
“आयी अब की साल दिवाली, मुँह पर अपने खून मले,
आयी अब की साल दिवाली,
चरों तरफ है घोरा अँधेरा, घर में दीप जले,
आयी अब की साल दिवाली…”

और अब जी एस टी आ गया है दिवाली के जश्न को कम करने के लिए

दिवाली के गानों में मतलब कम और शोर ज़्यादा हो रहा है आजकल, कुछ पहले के गानों पर रौशनी…

गाना: मेले है चिरागों के
फिल्म: नज़राना
दिवाली के यह खूबसूरत गाना राज कपूर और वैजयंतीमाला पर फिल्माया गया है। ब्लैक एंड वाइट गाना होने के बाद भी यह गाना दिवाली की सभी चमक को दर्शाता है।

गाना: लाखों तारे आसमा में मगर
फिल्म: हरियाली और रास्ता
इस गाने को मुकेश और लता मंगेशकर ने गाया है और इसे मनोज कुमार और माला सिन्हा पर फिल्माया गया है। यह गाना इतना सार्थक नहीं है लेकिन इसमें काफी दर्द है क्यूंकि इसमें रौशनी के त्यौहार के साथ मनुष्य के दर्द को दिखाया गया है।

गाना: आयी है अबके साल दिवाली
फिल्म: हकीकत
यह गाना निराशा के साथ शुरू होता है जिसमें सैनिकों के त्यौहार के समय अपने परिवार से दूर रहने की पीड़ा को दिखाया गया है। यह गाना काफी प्रोत्साहित है।

गाना: शहर की परियों
फिल्म: जो जीता वही सिकंदर
यह एक मस्ती भरा गाना है जिसमें लड़कों द्वारा गाँव की लड़कियों को छोड़कर शहर की लड़कियों के पीछे भागते हुए दिखाया गया है। इस गाने के लिए रौशनी के त्यौहार दिवाली के परफेक्ट बैकड्रॉप दिखाया गया है।

गाना: पैरों में बंधन है
फिल्म: पैरों में बंधन है
इस मश्शूर गाने में दिवाली के जोश को दिखाया गया है, इस गाने के अंदर ढोल की धुन इसे और उत्साहित बना देता है।

गाना: आयी है दिवाली
फिल्म: आमदनी अट्ठनी खर्चा रुपैया
यह एक हल्का गाना है जिसमें पति पत्नी को इस त्यौहार को मनाते दिखाया गया है। इस गाने में काफी पटाखे दिखाए जाते है।

गाना: हैप्पी दिवाली
फिल्म: होम डिलीवरी
पश्चिमी धुन के साथ इस गाने में दिवाली के जोश मनाया गया है। यह गाना बच्चों पर शूट किया गया है।

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